Basant Ritu Essay In Hindi Language

वसंत ऋतु साल का सबसे पसंदीदा मौसम है और सभी के द्वारा अन्य मौसमों से अधिक पसंद किया जाता है। विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के द्वारा वसंत ऋतु पर कुछ पैराग्राफ या पूरा निबंध लिखने के लिए दिया जा सकता है। इसलिए, हम विद्यार्थियों की मदद करने के उद्देश्य से वसंत ऋतु पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं, जो विभिन्न शब्द सीमाओं में लिखे गए हैं। इनमें से आप कोई भी वसंत ऋतु पर निबंध अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार चुन सकते हो।

वसन्त ऋतु पर निबंध (स्प्रिंग सीजन एस्से)

You can get below some essays on Spring Season in Hindi language for students in 100, 150, 250, 350, 400 and 450 words.

वसंत ऋतु पर निबंध 1 (100 शब्द)

वसन्त ऋतु का हम सभी को आनंद देने वाला होता है। भारत में वसन्त ऋतु मार्च, अप्रैल और मई के महीने में आती है। यह सर्दियों के तीन महीनों के लम्बे समय के बाद आती है, जिसमें लोगों को सर्दी और ठंड से राहत मिलती है। वसन्त ऋतु में तापमान में नमी आ जाती है और सभी जगह हरे-भरे पेड़ों और फूलों के कारण चारों तरफ हरियाली और रंगीन दिखाई देता है।

एक लम्बें इंतजार के बाद वह समय आता है, जब हम हल्के कपड़े पहनना शुरु करते हैं और प्राय कभी भी घर से बाहर जा सकते हैं। छोटे बच्चे पतंग उड़ाते हैं। इस मौसम की शुरुआत में होली का त्योहार आता है, जब सभी रंगों और पानी के साथ होली खेलने के द्वारा इस मौसम का आनंद लेते हैं।

वसंत ऋतु पर निबंध 2 (150 शब्द)

भारत में वसंत ऋतु सर्दियों के मौसम के बाद मार्च, अप्रैल और मई के महीने में आती है। यह मौसम गर्मियों के रुप मे खत्म होता है। भारत में वसंत मार्च के महीने में शुरु होता है और मई के महीने में खत्म होता है। भारत के कुछ भागों में, लोग इस मौसम का आनंद गर्म वातावरण के कारण पूरी तरह से नहीं ले पाते हैं। पूरी वसंत ऋतु के मौसम के दौरान तापमान सामान्य रहता है, न तो सर्दी की तरह बहुत अधिक ठंडा होता है और न ही गर्मी की तरह बहुत गर्म हालांकि, अन्त में यह धीरे-धीरे गर्म होना शुरु कर देता है। रात को मौसम और भी अधिक सुहावना और आरामदायक हो जाता है।

वसंत ऋतु बहुत प्रभावशाली होती है: जब यह आती है, तो प्रकृति में सबकुछ जाग्रत कर देती हैं; जैसे- यह पेड़, पौधे, घास, फूल, फसलें, पशु, मनुष्य और अन्य जीवित वस्तुओं को सर्दी के मौसम की लम्बी नींद से जगाती है। मनुष्य नए और हल्के कपड़े पहनते हैं, पेड़ों पर नई पत्तियाँ और शाखाएं आती है और फूल तरोताजा और रंगीन हो जाते हैं। सभी जगह मैदान घासों से भर जाते हैं और इस प्रकार पूरी प्रकृति हरी-भरी और ताजी लगती है।

वसंत ऋतु पर निबंध 3 (250 शब्द)

भारत में वसंत ऋतु को सबसे सुहावना मौसम माना जाता है। प्रकृति में सब कुछ सक्रिय होता है और पृथ्वी पर नए जीवन को महसूस करते हैं। वसंत ऋतु सर्दियों के तीन महीने के लम्बे अन्तराल के बाद बहुत सी खुशियाँ और जीवन में राहत लाती है। वसंत ऋतु सर्दियों के मौसम के बाद और गर्मियों के मौसम से पहले, मार्च, अप्रैल और मई के महीने में आती है। वसंत ऋतु का आगमन सभी देशों में अलग-अलग होने के साथ ही तापमान भी अलग-अलग देशों में अलग-अलग होता है। कोयल पक्षी गाना गाना शुरु कर देती है और सभी आम खाने का आनंद लेते हैं। प्रकृति में सभी जगह फूलों की खूशबू और रोमांस से भरी हुई होती हैं, क्योंकि इस मौसम में फूल खिलना शुरु कर देते हैं, पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं, आसमान पर बादल छाए रहते हैं, कलकल करती हुई नदियाँ बहती है आदि। हम कह सकते हैं कि, प्रकृति आनंद के साथ घोषणा करती है कि, वसंत आ गया है: अब यह उठने का समय है।

इस मौसम की सुन्दरता और चारों ओर की खुशियाँ, मस्तिष्क को कलात्मक बनाती है और आत्मविश्वास के साथ नए कार्य शुरु करने के लिए शरीर को ऊर्जा देती है। सुबह में चिड़ियों की आवाज और रात में चाँद की चाँदनी, दोनों ही बहुत सुहावने, ठंडे और शान्त हो जाते हैं। आसमान बिल्कुल साफ दिखता है और हवा बहुत ही ठंडी और तरोताजा करने वाली होती है। यह किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मौसम होता है, क्योंकि उनकी फसलें खेतों में पकने लगती हैं और यह समय उन्हें काटने का होता है। सभी आनंद और खुशियों को महसूस करते हैं क्योंकि, यह मौसम त्योहारों का मौसम है; जैसे- होली, राम नवमीं, हनुमान जयंती, गुड फ्राइडे, ईस्टर, बिहू, नवरोज, बैसाखी आदि।


 

वंसत ऋतु पर निबंध 4 (350 शब्द)

परिचय

भारत में वसंत ऋतु मार्च, अप्रैल और मई के महीने में, सर्दियों और गर्मियों के बीच में आती है। इसे सभी ऋतुओं के राजा के रुप में माना जाता है और युवाओं की प्रकृति के रुप में प्रसिद्ध है।

वसंत ऋतु के लाभ

वसंत ऋतु अच्छी भावनाएं, अच्छा स्वास्थ्य और पौधों को नया जीवन देती है। यह सबसे अधिक सुन्दर और आकर्षक मौसम है, जो फूलों के खिलने के लिए अच्छा मौसम है। मधुमक्खियाँ और तितलियाँ फूलों की कलियों के आस-पास मंडराती हैं और स्वादिष्ट जूस (फूलों की सुगंध) को चूसने का आनंद लेती है और शहद बनाती है। इस मौसम में लोग फलों के राजा, आम को खाने का आनंद लेते हैं। कोयल घने पेड़ों की शाखाओं पर बैठकर गाना गाती है और सबके दिलों को जीत लेती है। दक्षिण की दिशा से एक बहुत ही प्यारी और ठंडी हवा चलती है, जो फूलों की बहुत अच्छी सुगंध लाती है और हमारे दिलों को छूती है। यह लगभग सभी धर्मों के त्योहारों का मौसम है, जिसके दौरान लोग अपने परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर अच्छी तैयारियाँ करते हैं। यह किसानों का मौसम है, जब वे अपनी नई फसलों को अपने घरों में लाते हैं और कुछ राहत महसूस करते हैं। कवियों को कविताओं की रचना करने के लिए नई-नई कल्पनाएं मिलती हैं और वे अच्छी-अच्छी प्यारी कविताओं की रचनाएं करते हैं। इस मौसम में, मस्तिष्क बहुत अधिक कलात्मक और अच्छे विचारों से भरा होता है।

वसंत ऋतु के मौसम की हानियाँ

वसंत ऋतु की कुछ हानियाँ भी है। जैसा कि, ये मौसम सर्दियों के मौसम के अन्त में शुरु होता है और गर्मियों के शुरु होने से पहले आता है, जिसके कारण बहुत अधिक संवेदनशील मौसम होता है। बहुत से महामारी (छूत वाले रोग) वाले रोग, जैसे- सामान्य जुकाम, चेचक, चिकिन-पॉक्स, खसरा आदि होते हैं, इसलिए लोगों को अपने स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त तैयारियाँ करनी पड़ती है।

निष्कर्ष

वसंत ऋतु का मौसम सभी मौसमों का राजा होता है। वसंत ऋतु के दौरान प्रकृति अपने सबसे सुन्दर रुप में प्रकट होती है और हमारे हृदय को आनंद से भरती है। वसंत ऋतु का पूरी तरह से आनंद लेने के लिए, हमें हमारे स्वास्थ्य की देखभाल पहले से ही करनी चाहिए, जिसके लिए हमें विभिन्न छूत वाली बीमारियों से प्रतिरक्षा के लिए टीके लगवाने चाहिए।

वसंत ऋतु पर निबंध 5 (400 शब्द)

परिचय

वसंत ऋतु वर्ष का सबसे पसंदीदा और सबसे अच्छा मौसम होती है। लोग (विशेषरुप से बच्चे) इस मौसम की सुन्दरता, थोड़ी शान्ति और आरामदायक स्वभाव के कारण इसके बहुत अधिक शौकीन होते हैं। यह साल के सभी मौसमों की रानी होती है और इसे कवियों का सबसे पसंदीदा मौसम माना जाता है। यह सर्दियों के मौसम के बाद में और गर्मियों के मौसम से पहले आती है। यह मार्च के महीने से शुरु होती है और मई के महीने पर खत्म होती है। वसंत ऋतु के आगमन पर पृथ्वी पर सब-कुछ मनमोहक और आकर्षक लगता है। सभी पेड़ नई पत्तियों, के रुप में नए कपड़े प्राप्त करते हैं, फूल महकना शुरु कर देते हैं, पक्षी पेड़ों की शाखाओं पर नाचना और गाना शुरु कर देते हैं, आसमान बादलों के बिना बिल्कुल साफ और नीला होता है, मैदान हरी-भरी घास से भरे होते हैं और प्रकृति में अन्य बहुत से परिवर्तन होते हैं।

वसंत ऋतु फूलों और त्योहारों का मौसम है, इस प्रकार यह बहुत सी खुशियाँ और आनंद लाता है। रंग-बिरंगे और सुन्दर फूल पूरी तरह से दिल जीत लेते हैं और हरी घास हमें टहलने के लिए अच्छा मैदान देती है। सुबह या शाम को सुन्दर तितलियाँ प्राय हमारे ध्यान को खिंचती है। दिन और रात दोनों ही बहुत सुहावने और ठंडे होते हैं। वातावरण हर सुबह मधुमक्खियों, कोयल और अन्य पक्षियों की मधुर आवाज से आकर्षण से भरा होता है।

आनंद और खुशियों का मौसम

वसंत ऋतु का मौसम महान प्रसन्नता, आनंद और खुशी प्रदान करता है। सर्दियों में बहुत अधिक सर्दी होती है, गर्मी होती है और बरसात के मौसम में चारों ओर मिट्टी और गंदगी हो जाती है, इसी वजह से वसंत ऋतु आनंद और खुशियों का मौसम कही जाती है। सभी इस मौसम का बड़े स्तर पर आनंद लेते हैं और सर्दी और गर्मी के बीच के इस मौसम के सभी आकर्षणों को कैद करना चाहते हैं।

वसंत ऋतु सभी सजीवों के लिए; जैसे- पेड़, पौधे, फूलों, पशुओं, पक्षियों, मनुष्यों आदि के लिए आनंद और खुशियों का मौसम है, क्योंकि यह न तो बहुत अधिक गर्म होता है और न ही बहुत अधिक ठंडा। दिन और रात लगभग समान होते हैं, न तो बहुत अधिक बड़े और न ही बहुत अधिक छोटे। सभी सर्दियों में बहुत अधिक ठंड से, गर्मियों में बहुत अधिक गर्मी से और बरसात में बहुत अधिक मिट्टी और गंदगी से परेशान हो जाते हैं, लेकिन वसंत ऋतु इन सभी का मिश्रण होती है, जो स्वंय में सभी मौसमों की विशेषताओं को धारण करती है।

निष्कर्ष

वसंत ऋतु का वास्तविक सौंदर्य हमारे स्वास्थ्य को पोषण देता है और हम जीवन के सभी दुखों को भूल जाते हैं। यह हमारे हृदय को बहुत अधिक उत्साह, आनंद और खुशी से भर देती है। इसलिए, वास्तव में इस मौसम का आनंद हम सभी जगहों पर आकर्षक दृश्यों को देखकर लेते हैं।


 

वसंत ऋतु पर निबंध 6 (450 शब्द)

वसंत ऋतु तीन महीने की होती है हालांकि, इसकी चारों ओर की सुन्दरता के कारण ऐसा लगता है कि, यह बहुत थोड़े समय के लिए ही रहती है। पक्षी वंसत ऋतु के स्वागत में मीठी आवाज में गाना गाना शुरु कर देते हैं। तापमान सामान्य रहता है, इस मौसम में न तो बहुत अधिक सर्दी होती है और न ही बहुत अधिक गर्मी। चारों ओर की हरियाली के कारण यह हमें ऐसा महसूस कराता है कि, पूरी प्रकृति ने स्वंय को हरी चादर से ढक लिया है। सभी पेड़ और पौधे नया जीवन और नया रुप प्राप्त करते हैं, क्योंकि उनकी शाखाओं पर नई पत्तियाँ और फूल विकसित होते हैं। फसलें खेतों में पूरी तरह से पक जाती है और सभी तरफ वास्तविक सोने की तरह दिखती है।

पेड़-पौधों की शाखाओं पर नई और हल्की हरी पत्तियाँ आना शुरु होती है। सर्दियों की लम्बी खामोशी के बाद, पक्षी हमारे चारों ओर घर के पास और आसमान में चहचाना शुरु कर देते हैं। वसंत ऋतु के आगमन पर, वे स्वंय को तरोताजा महसूस करते हैं और अपनी खामोशी को मीठी आवाज के द्वारा तोड़ते हैं। उनकी गतिविधियाँ हमें यह महसूस कराती है कि, वे बहुत खुशी महसूस कर रहे हैं और भगवान को इस अच्छे मौसम को देने के लिए धन्यवाद कह रहे हैं।

इस मौसम की शुरआत में, तापमान सामान्य हो जाता है, जो लोगों को राहत महसूस कराता है, क्योंकि वे शरीर पर बिना गरम कपड़ों को पहने बाहर जा सकते हैं। अभिभावक सप्ताह के अन्त के दौरान बच्चों के साथ मस्ती करने के लिए पिकनिक का आयोजन करते हैं। फूलों की कलियाँ अपने पूरे शबाव में खिलती है और प्रकृति का स्वागत अच्छी मुस्कान के साथ करती है। फूलों का खिलना चारों ओर खूशबू को फैलाकर बहुत सुन्दर दृश्य और रोमांटिक भावनाओं का निर्माण करता है।

मनुष्य और पशु-पक्षी स्वस्थ, सुखी और सक्रिय महसूस करते हैं। लोग सर्दियों के मौसम में बहुत कम तापमान के कारण अपने रुके हुए कार्य और योजनाओं को इस मौसम में करना शुरु करते हैं। वसंत का बहुत ठंडा वातावरण और बहुत सामान्य तापमान लोगों को बिना थके बहुत अधिक कार्य करने के लिए तैयार करता है। सभी सुबह से शाम तक बहुत अच्छे से दिन की शुरुआत करते हैं, यहाँ तक कि, बहुत अधिक भीड़ होने के बाद भी तरोताजा और राहत महसूस करते हैं।

किसान बहुत अधिक खुश और राहत महसूस करते हैं, क्योंकि वे नई फसल को बहुत महीनों की कठिन मेहनत के बाद अपने घर पुरस्कार के रुप में सफलता पूर्वक लाते हैं। हम होली, हनुमान जंयती, नवरात्री और अन्य त्योहार अपने मित्रों, परिवार के सदस्यों, पड़ौसियों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर मनाते हैं। वसंत ऋतु, हमारे और पूरे वातावरण को प्रकृति की ओर से बहुत अच्छा तौहफा है और हमें बहुत अच्छा संदेश देती है कि, सुख और दुख एक के बाद एक आते जाते रहते हैं। इसलिए कभी भी बुरा महसूस नहीं करना चाहिए और धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि हमेशा काली घनी रात के बाद सुबह अवश्य होती है।


Previous Story

गर्मी के मौसम पर निबंध

Next Story

शरद ऋतु निबंध

निबंध नंबर : 01

बसन्त –ऋतु (ऋतुराज बसन्त)

Basant Ritu

भारत के प्राकृतिक सौन्दर्य को बढ़ाने वाली छ: ऋतुओ में से बसन्त ऋतु का महत्त्वपूर्ण स्थान है | इनमे सबसे अधिक मादक तथा आकर्षक ऋतु का आगमन मधु (चैत्र) तथा माधव (बैशाख) के महीनों में होता है | यह शिशिर ऋतु के समाप्त होने पर आती है | इसमें प्रकृति का सौदर्य सब ऋतुओ से बढ़ कर होता है |

बसन्त ऋतु के आगमन पर वृक्षों , पादपो तथा लताओं पर नई कोपले फूटने लगती है | इस ऋतु में आमो पर बौर आने लगता है | फूलो पर मुंडराती हुई तितलिया और मधुपान करने के लिए लालयित भ्रमर बड़े सुन्दर लगते है | इस रिती के आटे ही प्रकृति में नया जीवन आ जाता है | बाग़ – बगीचों में कोयले कूकने लगती है | खेतो में चारो और सरसों के पीले फूल ह्रदयो में मस्ती और आनन्द का सचार कर देते है | गुलमोहर, सूरजमुखी , चम्पा, गुलाब , गेदा, चमेली सब की अनुपम शोभा देखते ही बनती है |

इस ऋतु में आने वाले हो प्रसिद्ध त्यौहार है – बसन्त पंचमी तथा होली | बसन्त पंचमी का पर्व बसन्त आरम्भ होने के पाचवे दिन मनाया जाता है | ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का जन्म बसन्त पंचमी को हुआ था | इस दिन बच्चे और महिलाए बसंती वस्त्र फन कर नाचते-गाते तथा खुशिया मनाते है | बसन्त पंचमी का दिन बहुत शुभ माना जाता है | अंत: नामकरण , विवाह आदि कई शुभ कार्य इसी दिन किए जाते है | घरो में प्राय: केसरिया रंग के चावल, हलुआ तथा अन्य मिष्ठान बनाए जाते है |

होली भी इस ऋतु के रंगो और मस्ती को प्रकट करने वाला त्यौहार है | यह प्रह्राद की बुआ होलिका के दाह के उपलक्ष्य में होलिकोत्सव के नाम से प्रसिद्ध है | यह हर वर्षफाल्गुन मास की पूर्णिमा को बड़ी उमंग से मनाया जाता है | ऋतु बसन्त सृष्टि में नवीनता का प्रतिनिधि बन कर आता है | इस ऋतु में न अधिक गर्मी होती है और न ही अधिक सर्दी | इस ऋतु में गावो की शोभा देखते ही बनती है | चारो और खेतो में गेहू की सुंगरी बाले देखने वालो को हर्ष-विभोर कर देती है | नर-नारी, बाल-वृद्ध सभी के ह्रदयो में अपूर्व उत्साह और आनन्द की तरंगे दौड़ने लगती है | अत : बसन्त के आगमन के प्रभाव से सारी दिशाए हरी-भरी , रंगीन तथा मदमस्त हो जाया करती है |

 

निबंध नंबर – 02 

 

बसंत ऋतु

Basant Ritu

हमारा देश भारत के प्रकृति की अनोखी क्रीड़ास्थली है। प्रकृति अपने नए-नए रूपों में आकर अपनी शोभा का प्रदशन करती है। जहां छह ऋतुएं बारी-बारी आकर श्रंगार करती है। सभी ऋतुओं की अपनी-अपनी विशेषता एंव शोभा है और अपनी-अपनी महत्ता है। हेमंत ऋतु में प्रकृति उस ठगी हुई नारी के समान दिखाई देती है जिसके रूप में उसका मुख चंद्रमा के समान प्रतीत होता है और उसके बाद आती है चिर प्रतीक्षित बसंत ऋतु।

भारत में प्रत्येक ऋतु का समय प्राय: दो-दो महीनों का होता है। ज्येष्ठ और आषाढ़ में ग्रीष्म, श्रावण और भादों में वर्षा, अश्विन-कार्तिक में शरद, मार्ग-पौष में हेमुंत, माघ और फाल्गुन में शिशर और चैत्र और बैसाख में बसंत।

बसंत ऋतु का समय अंग्रेजी गणना के अनुसार 15 फरवरी से 15 अप्रैल तक माना जाता है। इस ऋतु में न तो अधिक गमी्र और न ही अधिक सर्दी बसंत के आने से पूर्व शिशिर और हेमंत ऋतु की कड़ाके की सर्दी को प्रकृति नहीं सह पाती। इसलिए पुष्प मुरझा जाते हैं। पत्ते सूख जाते हैं। हेमंत तो पतझड़ के रूप में आकर वृक्षों का पत्र विहीन कर देती है। पेड़ ठूंठ हो जाते हैं और तब आगमर होता है ऋतु राज बसंत का जिसके मादक स्पर्ष पाकर पृथ्वी का रोम-रोम रोमांचित हो उठता है। वृक्षों में नए पत्ते आने लगत ेळें। आम के वृक्षा मंजरियों से लद जाते हैं। कोयल पंचम स्वर में कूक उठती है, नवविकसित कलियां अंगड़ाइयां लेने लगती है। रंग-बिरंगी तितलियां फूलों पर मंडराने लगती है। भ्रमरों के गु्रजन से उपवन गूंजने लगता है। शीतल-मंद सुगंधित समीर का स्पर्श पाकर जन-मन में गुदगुदी पैदा होने लगती है।

पौराणिक कथा के अनुसार बसंत को रूप सौंदर्य के देवता कामदेव का पुत्र बताया है। रूप सौंदार्य के देवता कामदेव के घर में पुत्रोत्पति का समाचार पाते ही प्रकृति नृत्य करने गती है और उसके अंग-प्रत्यंग थिरकने लगते हैं। तरह-तरह के फूल उसके आभूषण बन जाते हैं तथा कोयल की कूक उसकी मधुर स्वर पीली-पीली सरसों ठंडी हवा में लहराकर ऋतुराज के आने की घोषणा करती है। कामदेव का पुत्र बसंत वृक्षों की डालियों के झूले में सोया हुआ रहता है। प्रात: काल होते ही गुलाब चटकारी देकर उसे जगाने का प्रयास करना पड़ता है:

डार दु्रम पलना बिछौना नव पल्लव के

सुमन झगुला-सा है तन छवि भारी दे।

मदन महीपजु के बालक बसंत ताहि

प्राहित जगावत गुलाब चटकारी दे।

होली, बसंत पंचमी जैसे त्यौहार इसी ऋतु में आते हैं। किसानों के लिए यह ऋतु सुख का संदेश लाती है। उसके खेतों में खड़ी सरसों ऐसी प्रतीत होती है कि पृथ्वी ने पीली चुनरी ओढ़ ली हो तथा धरती एक नई-नवेली दुल्हन  बन गई हो। बसंत के सौंदर्य से अभिभूत होकर सर्वेश्वर दयाल जी कहते हैं-

आए महंत वसंत

मखमल से झूले पड़े हाथी-सा टीला

बैठे किंशुक छत्र लगा बांधा पाग पीला

चँवर सदृश डोल रे सरसों के सर अनंत

आए महंत वसंत।

किवंदती है कि पंचमी के दिन ही ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का अविभार्व हुआ इसलिए इस दिन सरस्वती पूजन भी किया जाता है। यह दिन हिंदी के महान कवि निराला जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

बसंत ऋतु स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम होती है। इन दिनों में शरीर में नए रक्त का संचार होता है। बसंत, उत्साह उमंग, सौंदर्य तथा हर्षोल्लास का त्यौहार है।

 

निबंध नंबर : 02 

 

बसंत ऋतु

Basant Ritu

ऋतुओं का राजा वसंत, कितना सुंदर! कितना मोहक! भारत-भूमि को ही यह परम सौभाज्य प्राप्त है कि यहां साल में छ: ऋतुओं का अलग-अलग स्वाद चखने और आनंद भोगने का सुख प्राप्त होता है। संसार के बाकी देशों में दो ऋतुएं ही मुख्य रूप में रहती हैं। कहीं सदाबहार शीत ऋतु और कहीं कड़ाकेदार ग्रीष्म ऋतु। कुछ ही देश हैं, जहां थोड़े समय तीसरी वसंत ऋतु के भी दर्शन हो जाते हैं, अन्यथा विश्व के अनेक देश तो दो के सिवाय तीसरे के रंग-रूप और प्रभाव से तो क्या नाम तक से भ्ज्ञी परिचित नहीं है। है न प्रकृति की यह विचित्र बात!

भारत में मान्य ऋतु-चक्र वसंत से आरंभ होता है। वसंत के बाद ग्रीष्म फिर क्रम से वर्षा, शरद, शीत और शिशर या पतझड़ ऋतुएं आती हैं। इनमें से शरद को यदि ऋतुओं की रानी कहा जाता है तो वसंत को ऋतुराज। वसंत अपने प्राकृतिक वैभव-विकास की संपन्नता के कारण वास्तव में है भी सभी ऋतुओं का राजा कहलाने के योज्य। इसका आगमन कड़ाके की सर्दी वाली ऋतु पतझड़ या शिशिर के बाद होता है। इसके पदार्पण करते ही प्रकृति और मौसम के तेवर अपने-आप ही बदलने लग जाते हैं। चारों ओर का सारा वातावरण गुलाबी-गुलाबी हो उठता है। प्रकृति का रंग-रूप  भी गुलाबी ओर ठंडक भ्ज्ञी गुलाबी-यानी सभी कुछ सुंदर, आकर्षक, मनमोहक और आनंददायक। शिशिर ऋतु की मार से आहत-पीडि़त पेड़-पौधे पत्तों-फूलों के नए-नए परिधानों से सजने-संवरने लगते हैं। वृक्षों के सहारे ऊपर उठती लतांए हरी-भरी हो और फूलकर रंगीन होते वृक्षों से लिपट झूम-झूम जाती हैं। मंद-मंद बहती हवा नए खिले फूलों, बौराए फल-वृक्षों की भीनी-मधुर सुगंध चुराकर सारे वातावरण में बांट आती है। फलस्वरूप वातावरण के साथ-साथ तन-मन भी महक उठते हैं। मखमली घास उन मंद झोंकों से लोगों के पांवों बिछ जाती है। उस पर घने पत्तों की ओट में छिपकर बैठी कोयल जब अचानक कुहुक उठती है, तो वास्तव में युवक-युवतियों, प्रेमियों-विराहियों के तन-मन में भी एक हूक और सिहरन भर उठती है। सचमुच, ऋतुराज वसंत का सौंदर्य और प्रभाव निाराल और अचूक है। घास पर पड़ी ओस की बूंदें तन-मन को एक अनोखी तरावट प्रदान कर ऋतुराज वसंत को जैसे स्वच्छ-सच्चे मोतियों के हार पहना उसका स्वागत करने लगती हैं। परंतु सखेद स्वीकार करना पड़ता है कि आज के विषम नगरीय वातावरण में हम वसंत ऋतु का आनंद नहीं ले पाते। उसके आने-जाने का प्राय: पता ही नहीं चल पाता।

वनों-बागों से निकल अब तनिक हरे-भरे और पीला श्रंगार किए सरसों के खेतों की ओर चलिए। लगता है जैसे खेतों का जर्रा-जर्रा दूर-दूर तक कोमल कांत बासंती रंग में रंगा जाकर महक-लहक उठा हो। वह मादकता तन-मन में भरकर एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार कर देती है। फिर जब प्रकृति का कोई राजकुमार कृषक कुमार या राजकुमारी कृषक कन्या उन खेतों की मेंड़ पर किसी मधुर गीत का अलाप भर उठते हैं, तब तो लगने लगता है, जैसे ऋतुराज वसंत का पोर-पोर गीत और वृक्षों की मर्मर ध्वनि के संगीत की धुनों पर नाचने लगा है। उसी समय कोयल की कहीं दूर सु सुनाई देती कुहुक एक बार फिर रोम-रोम को संगीतमय बनाकर आकुल-व्याकुल कर देती है। वास्तव में ऐसा ही होता है ऋतुराज वसंत के दर्शन का अदभुत आनंद और उत्साह, जो गांव के वातावरण में तो कुछ मात्रा में आज भी सुलभ है, पर नगरों में तो कतई नहीं।

वसंत ऋतु की पंचमी तिथि को कई स्थानों पर मेले भी जुड़ते हैं, कई प्रकार के उत्सव-समारोह भी मनाए जाते हैं। विशेषकर युवती ललनांए जब धानी और पीले परिधान ओढक़र उन मेलों-उत्सवों में इधर-उधर घूमती दीख पड़ती हैं, तब तो लगता है जैसे स्वंय वसंत ने ही कई-कई साकार स्वरूप धारण कर लिए हों। सौंदर्य और योवन जैसे चारों और साकार हो उठा हो। इस प्रकार ऋतुराज वसंत सौंदर्य और आनंद का प्रतीक है। पर कहा जाता है कि वसंत का यह मादक सौंदर्य विरहियों के लिए विशेषकर दुखदायी हो जाया करता है। हो जाया करता होगा। पर हमारा अनुमान है कि विरह की यह पीड़ा भी एक प्रकार के सौंदर्यमय आनंद की सृष्टि करने वाली ही होती हरेगी। भला यौवन और सौंदर्य की ऋतु में दुख-पीड़ा की असुंदरता का क्या काम। आज की हमारी मानव-सभ्यता-संस्कृति जिन राहों पर बढ़ रही है, उनमें वसंत ऋतु का आनंद और शोभा एक किताबी वस्तु ही बनती जा रही है। वनों-उपवनों में बस्तियों के जंगल उगकर स्वंय मनुष्य ही प्रकृति का नाश कर रहे हैं। इसे दुर्भाज्य का सूचक कहा जा सकता है और कुछ नहीं।

January 28, 2017evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentHindi Essay, Hindi essays

About evirtualguru_ajaygour

The main objective of this website is to provide quality study material to all students (from 1st to 12th class of any board) irrespective of their background as our motto is “Education for Everyone”. It is also a very good platform for teachers who want to share their valuable knowledge.

0 thoughts on “Basant Ritu Essay In Hindi Language”

    -->

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *